Cycle ka avishkar kisne kiya tha | साइकिल का आविष्कार किसने किया और कब किया ?

Cycle ka avishkar kisne kiya tha | साइकिल का आविष्कार किसने किया और कब किया ?

आज के इस टॉपिक में हम जानेंगे साइकिल का आविष्कार किसने किया साइकिल को पहली बार किसने बनाया साइकिल कब बनी इन सारी बातों का स्तर पूर्व से आज के इस आर्टिकल में हम बात करेंगे।

क्या आप एम पीएम का फुल फॉर्म जानते हैं कुछ लोगों को इसके बारे में पहले से ही पता होगा परंतु बहुत से लोग ऐसे भी हैं इन्हें उसके बारे में नहीं पता होगा।   क्या आप एम पीएम का फुल फॉर्म या फिर एम पीएम से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए हमारे ब्लॉग पर आए हैं।

 

आज के इस दौर में साइकिल की आवश्यकता कौन जरूर हो गई है लेकिन खत्म नहीं हुई पेट्रोल और डीजल से बचने वाले वाहनों की जगह दुनिया में प्रदूषण बहुत ज्यादा बढ़ रहा है। 

और इसी वजह से साइकिल की उपयोगिता वापस बड़ी है नीदरलैंड जैसे देश में साइकिल को काफी बढ़ावा दिया गया। 

साइकिल का आविष्कार एक लोहार ने किया था जिसका नाम किर्कपैट्रिक मैकमिलन जो स्कॉटलैंड का रहने वाला था ऐसा नहीं है कि इससे पहले साइकिल का अस्तित्व नहीं था। 

लेकिन साइकिल को आगे बढ़ाने के लिए पैरों से जमीन को पीछे से खेला जाता था किर्कपैट्रिक ने ऐसी व्यवस्था की जिससे साइकिल को पैर ओके एयरपोर्ट से चलाया जा सके। 

सबसे पहले बनाए गए साइकिल लकड़ी की बनी हुई थी इस साइकिल को हॉबी हॉर्स कहा गया लेकिन यह साइकिल चलाने में बहुत ज्यादा एफर्ट लगता था जिससे हम को चलाने का थकावट होती थी। 

पैदल से घुमाने वाले पहिए का आविष्का अविष्कार 1865 मैं पेरिस में हुआ था इस आविष्कार का नाम लाल मेंट था इस पहिए को एलओसी पर कहा गया था अपने समय में यह बहुत लोकप्रिय था। 

साइकल भारत में भी काफी लोकप्रिय हुई और आजादी के बाद 90 के दशक तक भारतीय लोगों में इसका व्यापक इस्तेमाल होता था एवं मुख्य व्यापारिक और व्यक्तिगत शासन थी जो हर क्षेत्र में इस्तेमाल होती थी। 

आज भी कुरियर बांटने वाले इसका इस्तेमाल करते हैं और हां साइकिलिंग रेस भी दुनिया में काफी लोकप्रिय। 

1990 देश में आर्थिक उदारीकरण इकोनामिक लिबरलाइजेशन का दौर था और इसी दौर में भारत में मोटरसाइकिल का प्रवेश हुआ। 

उस दौर में स्कूटर भी आया और मध्यम वर्ग में बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो गया। 
 
युवाओं को मोटरसाइकिल ज्यादा भाई और युवा मोटरसाइकिल को ज्यादा इस्तेमाल करने लगे। 

भारतीय शहरों में साईकिल तो एकदम बंद ही हो गई थी और गांव में भी बाइक और अपने पैर पसारने शुरू हो गए यह राजपूत और बजाज का दौर था लेकिन बदलते वक्त के साथ यह भी बदलना था और हीरो हौंडा देश की धड़कन बन गया। 



आप ये आर्टिकल भी पढ़े। 


आप कमेंट बॉक्स में अपनी राय छोड़ सकते हैं। 
हमारा आर्टिकल पड़ने के लिए धन्यवाद।
आपका दिन शुभ रहे। 

0 Comments

Post a Comment

If you have any doubts, Please let me know